Class 9 Hindi · Chapter 6 Notesरीढ़ की हड्डी

Class 9 Hindi Chapter Notes: रीढ़ की हड्डी. Learn about the story, characters, social inequality, human sensitivity, and literary style.

4 topics5 sample MCQs5 practice questions
Chapter contents

Chapter summary

रीढ़ की हड्डी जगदीशचंद्र माथुर द्वारा लिखित एक एकांकी है जो 1939 में लिखी गई थी। यह कहानी भारतीय समाज में परंपरागत विवाह की व्यवस्था और महिलाओं की स्थिति पर प्रकाश डालती है। कहानी में उमा नाम की एक शिक्षित लड़की की कहानी है, जो अपने माता-पिता और गोपालप्रसाद और उनके बेटे शंकर के बीच विवाह के प्रस्ताव पर चर्चा करती है। यह एकांकी सामाजिक विषमता, वर्ग संघर्ष, और मानवीय संवेदनशीलता के महत्वपूर्ण विषयों को उठाती है। इस अध्याय में, हम कहानी का परिचय, पात्रों का परिचय, सामाजिक विषमता और वर्ग संघर्ष, मानवीय संवेदनशीलता और करुणा, भाषागत विशेषताएँ और साहित्यिक शैली, और कहानी का संदेश और समालोचनात्मक विश्लेषण का अध्ययन करेंगे।

What you'll learn

1समाज में परंपरागत विवाह व्यवस्था की समस्याओं को समझें
2कहानी के मुख्य पात्रों और उनके चरित्रों का विश्लेषण करें
3सामाजिक विषमता और वर्ग संघर्ष के कारणों और प्रभावों को समझें
4मानवीय संवेदनशीलता और करुणा के महत्व को समझें
5कहानी की भाषागत विशेषताओं और साहित्यिक शैली का अध्ययन करें
6कहानी के संदेश और समालोचनात्मक विश्लेषण को समझें

Chapter at a glance

01कहानी का परिचय और पात्र परिचय
02सामाजिक विषमता और वर्ग संघर्ष
03भाषागत विशेषताएँ और साहित्यिक शैली
04कहानी का संदेश और समालोचनात्मक विश्लेषण

Detailed chapter notes

01

कहानी का परिचय और पात्र परिचय

रीढ़ की हड्डी एक एकांकी है जो भारतीय समाज में परंपरागत विवाह की व्यवस्था और महिलाओं की स्थिति पर केंद्रित है। कहानी का मुख्य पात्र उमा है, जो एक शिक्षित लड़की है और अपने माता-पिता और गोपालप्रसाद और उनके बेटे शंकर के बीच विवाह के प्रस्ताव पर चर्चा करती है। उमा की शिक्षा और स्वतंत्रता उसके माता-पिता और गोपालप्रसाद के लिए एक समस्या बन जाती है, क्योंकि वे एक शिक्षित लड़की को विवाहित करने में संकोच करते हैं। कहानी में उमा की दृढ़ता और स्वाभिमान को दिखाया गया है, जो उसे अपने माता-पिता और गोपालप्रसाद के सामने खड़ा कर देता है।

  • उमाशिक्षित लड़की, स्वतंत्र और स्वाभिमानी
  • रामस्वरूप (बाबू)उमा का पिता, परंपरावादी
  • प्रेमाउमा की माँ, रामस्वरूप की पत्नी
  • शंकरगोपालप्रसाद का बेटा, विवाह का प्रस्तावक
  • गोपालप्रसादशंकर का पिता, विवाह का प्रस्तावक
  • रतनरामस्वरूप का घरेलू सहायक
02

सामाजिक विषमता और वर्ग संघर्ष

रीढ़ की हड्डी में सामाजिक विषमता और वर्ग संघर्ष के महत्वपूर्ण पहलू उजागर किए गए हैं। कहानी में उमा की शिक्षा और स्वतंत्रता उसके माता-पिता और गोपालप्रसाद के लिए एक समस्या बन जाती है, क्योंकि वे एक शिक्षित लड़की को विवाहित करने में संकोच करते हैं। यह सामाजिक विषमता और वर्ग संघर्ष की प्रतीक है, जहां शिक्षित महिलाओं को समाज में अपने स्थान की लड़ाई लड़नी पड़ती है। उमा की दृढ़ता और स्वाभिमान उसे अपने माता-पिता और गोपालप्रसाद के सामने खड़ा कर देता है, जो सामाजिक विषमता और वर्ग संघर्ष के खिलाफ एक प्रतिरोध का प्रतीक है।

  • शिक्षित महिलाओं की सामाजिक विषमता
  • विवाह की परंपरागत व्यवस्था का खंडन
  • सामाजिक विषमता और वर्ग संघर्ष का प्रतिरोध
  • उमा की दृढ़ता और स्वाभिमान
03

मानवीय संवेदनशीलता और करुणा

रीढ़ की हड्डी में मानवीय संवेदनशीलता और करुणा के महत्वपूर्ण पहलू उजागर किए गए हैं। उमा की शिक्षा और स्वतंत्रता उसके माता-पिता और गोपालप्रसाद के लिए एक समस्या बन जाती है, लेकिन उमा की दृढ़ता और स्वाभिमान उसे अपने माता-पिता और गोपालप्रसाद के सामने खड़ा कर देता है। यह मानवीय संवेदनशीलता और करुणा का प्रतीक है, जहां एक शिक्षित लड़की अपने अधिकारों और स्वतंत्रता के लिए लड़ती है। उमा की करुणा और संवेदनशीलता उसे अपने माता-पिता और गोपालप्रसाद के सामने खड़ा कर देती है, जो मानवीय संवेदनशीलता और करुणा के महत्व को उजागर करती है।

  • उमा की शिक्षा और स्वतंत्रता
  • उमा की दृढ़ता और स्वाभिमान
  • मानवीय संवेदनशीलता और करुणा का महत्व
  • उमा की करुणा और संवेदनशीलता
04

भाषागत विशेषताएँ और साहित्यिक शैली

रीढ़ की हड्डी में भाषागत विशेषताएँ और साहित्यिक शैली के महत्वपूर्ण पहलू उजागर किए गए हैं। कहानी में उपयोग की गई भाषा सरल और स्पष्ट है, जो पाठकों को कहानी के मुख्य बिंदुओं को समझने में मदद करती है। साहित्यिक शैली में व्यंग्य और हास्य का उपयोग किया गया है, जो कहानी को अधिक रोचक और मनोरंजक बनाता है। कहानी में पात्रों के बीच संवाद का उपयोग किया गया है, जो कहानी को अधिक जीवंत और वास्तविक बनाता है।

  • सरल और स्पष्ट भाषा
  • व्यंग्य और हास्य का उपयोग
  • पात्रों के बीच संवाद
  • जीवंत और वास्तविक कहानी
05

कहानी का संदेश और समालोचनात्मक विश्लेषण

रीढ़ की हड्डी का मुख्य संदेश है कि शिक्षित महिलाओं को अपने अधिकारों और स्वतंत्रता के लिए लड़ना चाहिए। कहानी में उमा की दृढ़ता और स्वाभिमान को दिखाया गया है, जो उसे अपने माता-पिता और गोपालप्रसाद के सामने खड़ा कर देता है। यह संदेश सामाजिक विषमता और वर्ग संघर्ष के खिलाफ एक प्रतिरोध का प्रतीक है। समालोचनात्मक विश्लेषण में, कहानी का मुख्य बिंदु उमा की शिक्षा और स्वतंत्रता है, जो उसके माता-पिता और गोपालप्रसाद के लिए एक समस्या बन जाती है। यह विश्लेषण सामाजिक विषमता और वर्ग संघर्ष के महत्वपूर्ण पहलू उजागर करता है, जहां शिक्षित महिलाओं को समाज में अपने स्थान की लड़ाई लड़नी पड़ती है।

  • शिक्षित महिलाओं के अधिकारों और स्वतंत्रता के लिए लड़ना
  • सामाजिक विषमता और वर्ग संघर्ष के खिलाफ प्रतिरोध
  • उमा की शिक्षा और स्वतंत्रता
  • सामाजिक विषमता और वर्ग संघर्ष के महत्वपूर्ण पहलू
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Quick revision: key points

  • रीढ़ की हड्डी जगदीशचंद्र माथुर द्वारा लिखित एक एकांकी है
  • कहानी भारतीय समाज में परंपरागत विवाह की व्यवस्था और महिलाओं की स्थिति पर केंद्रित है
  • उमा: शिक्षित लड़की, स्वतंत्र और स्वाभिमानी
  • रामस्वरूप (बाबू): उमा का पिता, परंपरावादी
  • प्रेमा: उमा की माँ, रामस्वरूप की पत्नी
  • शंकर: गोपालप्रसाद का बेटा, विवाह का प्रस्तावक
  • गोपालप्रसाद: शंकर का पिता, विवाह का प्रस्तावक
  • रतन: रामस्वरूप का घरेलू सहायक
  • कहानी में सामाजिक विषमता और वर्ग संघर्ष के महत्वपूर्ण पहलू उजागर किए गए हैं
  • कहानी में मानवीय संवेदनशीलता और करुणा के महत्वपूर्ण पहलू उजागर किए गए हैं

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Try each question first, then reveal the answer.

Question 01

'रीढ़ की हड्डी' एकांकी के लेखक कौन हैं?

  • Aजगदीशचंद्र माथुर
  • Bमोहन राकेश
  • Cभीष्म साहनी
  • Dहरिशंकर परसाई
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Answer: (A) जगदीशचंद्र माथुर

पाठ के आरंभ में लेखक का नाम जगदीशचंद्र माथुर दिया गया है।

Question 02

एकांकी 'रीढ़ की हड्डी' में गोपालप्रसाद और रामस्वरूप के बीच संवाद से कौन-सी सामाजिक विषमता उजागर होती है?

  • Aस्त्री-पुरुष में शिक्षा की असमानता
  • Bधन का असमान वितरण
  • Cजाति-पाति का भेदभाव
  • Dशहरी और ग्रामीण जीवन का अंतर
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Answer: (A) स्त्री-पुरुष में शिक्षा की असमानता

गोपालप्रसाद स्पष्ट कहता है कि लड़कों की पढ़ाई और लड़कियों की पढ़ाई एक बात नहीं है, जो शिक्षा में लैंगिक असमानता को दर्शाता है।

Question 03

एकांकी 'रीढ़ की हड्डी' में उमा के चरित्र के माध्यम से लेखक ने किसका प्रतिनिधित्व किया है?

  • Aपढ़ी-लिखी और आत्मविश्वासी महिला का
  • Bपरंपरागत और संकोची महिला का
  • Cअशिक्षित और भोली महिला का
  • Dविद्रोही और उद्दंड महिला का
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Answer: (A) पढ़ी-लिखी और आत्मविश्वासी महिला का

पाठ के आरंभ में ही उमा को 'पढ़ी-लिखी सिक्त महिला' कहा गया है, और वह अपने विचार स्पष्टता से व्यक्त करती है।

Question 04

एकांकी 'रीढ़ की हड्डी' की भाषा की मुख्य विशेषता क्या है?

  • Aसंस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली
  • Bसरल, स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण खड़ी बोली
  • Cब्रजभाषा पर आधारित भाषा
  • Dउर्दू मिश्रित भाषा
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Answer: (B) सरल, स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण खड़ी बोली

पाठ में संवाद स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण हैं, जैसे 'मोर के पंख होते हैं, मोरनी के नहीं'। यह खड़ी बोली में है।

Question 05

एकांकी ‘रीढ़ की हड्डी’ का शीर्षक किसका प्रतीक है?

  • Aशरीर के एक आवश्यक अंग का
  • Bव्यक्ति की ऊँचाई के आधार का
  • Cआत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का
  • Dशारीरिक शक्ति और परिश्रम का
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Answer: (C) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का

अभ्यास के प्रश्न 1 के अनुसार, ‘रीढ़ की हड्डी’ शीर्षक आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का प्रतीक है, जैसा कि उमा शंकर की कायरता पर व्यंग्य करते हुए कहती है कि उसकी रीढ़ की हड्डी (बैकबोन) नहीं है।

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Sample questions and answers

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Q1. एकांकी 'रीढ़ की हड्डी' का परिचय देते हुए बताइए कि इसका मुख्य विषय क्या है?

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यह एकांकी जगदीशचंद्र माथुर द्वारा रचित है। इसकी रचना 1939 में हुई थी। इसका मुख्य विषय भारतीय समाज में प्रचलित विवाह की व्यवस्था और स्त्रियों की शिक्षा को लेकर रूढ़िवादी सोच पर व्यंग्य करना है। उस समय लड़कियों को शिक्षा और अन्य कार्यों में समान अवसर नहीं मिलते थे। एकांकी में कम पढ़ी-लिखी लड़कियों की माँग और विवाह में लेन-देन जैसी कुरीतियों को उजागर किया गया है।

Sample question3 marks

Q2. एकांकी 'रीढ़ की हड्डी' में सामाजिक विषमता के कौन-कौन से रूप उजागर हुए हैं? उदाहरण सहित लिखिए।

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Model answer

इस एकांकी में सामाजिक विषमता के अनेक रूप दिखाई देते हैं। सबसे प्रमुख है लड़के और लड़की की शिक्षा में भेदभाव। गोपालप्रसाद अपने बेटे को बी.एससी. तक पढ़ाता है, लेकिन बहू के लिए सिर्फ मैट्रिक पास लड़की चाहता है। वह कहता है कि लड़कों की पढ़ाई और लड़कियों की पढ़ाई एक बात नहीं है। दूसरा रूप है लड़की को वस्तु की तरह देखना, उसकी सुंदरता और गुणों को परखना, जैसे बाजार में सामान खरीदा जाता है। तीसरा रूप है लड़की के माता-पिता की मजबूरी, जो बेटी की शिक्षा छिपाकर शादी कराना चाहते हैं।

Sample question3 marks

Q3. एकांकी 'रीढ़ की हड्डी' में उमा के चरित्र के माध्यम से मानवीय संवेदनशीलता और करुणा का कैसा चित्रण हुआ है? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

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Model answer

उमा एक संवेदनशील और आत्मसम्मान से भरी लड़की है। वह अपने साथ हो रहे अन्याय पर दुखी होती है, जैसे उसे 'कुर्सी-मेज़' या 'भेड़-बकरी' की तरह परखा जा रहा है। वह गोपालप्रसाद और शंकर के व्यवहार से आहत होकर उनकी कायरता पर व्यंग्य करती है। साथ ही, वह अपने माता-पिता की मजबूरी को समझती है और उन्हें दोष नहीं देती, बल्कि अपनी बात रखकर उन्हें भी आत्मसम्मान का पाठ पढ़ाती है।

Sample question3 marks

Q4. एकांकी 'रीढ़ की हड्डी' की भाषा की मुख्य विशेषताएँ बताइए।

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Model answer

एकांकी की भाषा सरल, स्वाभाविक और संवादात्मक है। इसमें मुहावरों और कहावतों का प्रयोग किया गया है, जैसे 'बाप सेर है तो लड़का सवा सेर' और 'भीगी बिल्ली की तरह'। भाषा में व्यंग्य और हास्य का पुट है, जो पात्रों की सोच को उजागर करता है। संवाद छोटे और प्रभावी हैं, जो पात्रों के चरित्र को स्पष्ट करते हैं।

Sample question3 marks

Q5. 'रीढ़ की हड्डी' एकांकी का शीर्षक किसका प्रतीक है और यह कहानी के संदेश को कैसे उजागर करता है?

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Model answer

'रीढ़ की हड्डी' शीर्षक आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का प्रतीक है। यह उमा के चरित्र के माध्यम से स्पष्ट होता है, जो अपने अधिकारों के लिए खड़ी होती है और शंकर जैसे लड़के की कायरता को उजागर करती है। कहानी का संदेश है कि व्यक्ति को अपने सिद्धांतों पर अडिग रहना चाहिए, चाहे समाज की रूढ़ियाँ कैसी भी हों।

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Frequently asked questions

रीढ़ की हड्डी का मुख्य संदेश क्या है?

रीढ़ की हड्डी का मुख्य संदेश है कि शिक्षित महिलाओं को अपने अधिकारों और स्वतंत्रता के लिए लड़ना चाहिए। कहानी में उमा की दृढ़ता और स्वाभिमान को दिखाया गया है, जो उसे अपने माता-पिता और गोपालप्रसाद के सामने खड़ा कर देता है।

रीढ़ की हड्डी में सामाजिक विषमता और वर्ग संघर्ष के महत्वपूर्ण पहलू क्या हैं?

रीढ़ की हड्डी में सामाजिक विषमता और वर्ग संघर्ष के महत्वपूर्ण पहलू उजागर किए गए हैं। कहानी में उमा की शिक्षा और स्वतंत्रता उसके माता-पिता और गोपालप्रसाद के लिए एक समस्या बन जाती है, क्योंकि वे एक शिक्षित लड़की को विवाहित करने में संकोच करते हैं।

रीढ़ की हड्डी में भाषागत विशेषताएँ और साहित्यिक शैली क्या हैं?

रीढ़ की हड्डी में भाषागत विशेषताएँ और साहित्यिक शैली के महत्वपूर्ण पहलू उजागर किए गए हैं। कहानी में उपयोग की गई भाषा सरल और स्पष्ट है, जो पाठकों को कहानी के मुख्य बिंदुओं को समझने में मदद करती है। साहित्यिक शैली में व्यंग्य और हास्य का उपयोग किया गया है, जो कहानी को अधिक रोचक और मनोरंजक बनाता है।

रीढ़ की हड्डी में मानवीय संवेदनशीलता और करुणा के महत्वपूर्ण पहलू क्या हैं?

रीढ़ की हड्डी में मानवीय संवेदनशीलता और करुणा के महत्वपूर्ण पहलू उजागर किए गए हैं। उमा की शिक्षा और स्वतंत्रता उसके माता-पिता और गोपालप्रसाद के लिए एक समस्या बन जाती है, लेकिन उमा की दृढ़ता और स्वाभिमान उसे अपने माता-पिता और गोपालप्रसाद के सामने खड़ा कर देता है।

रीढ़ की हड्डी में पात्रों का परिचय क्या है?

रीढ़ की हड्डी में मुख्य पात्रों का परिचय दिया गया है। उमा एक शिक्षित लड़की है, जो स्वतंत्र और स्वाभिमानी है। रामस्वरूप उमा का पिता है, जो परंपरावादी है। प्रेमा उमा की माँ है, जो रामस्वरूप की पत्नी है। शंकर गोपालप्रसाद का बेटा है, जो विवाह का प्रस्तावक है। गोपालप्रसाद शंकर का पिता है, जो विवाह का प्रस्तावक है। रतन रामस्वरूप का घरेलू सहायक है।

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